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क्या आपको शर्म आती है ?

Written By Unknown on Tuesday, June 11, 2013 | 10:41 PM

आपने दुकान से चार रुपये की सिगरेट खरीदी बडी । शान से । यह क्या कर रहे है आप ? छि माचिस मांग रहे है एक रिक्शा चालक से जो बडी मेहनत करके माचिस खरीदता है । उस माचिस से आपने सिगरेट सुलगाइ है । सोचो कितना घृणित काम किया है आपने जहरीला धुँआ छोडा है । यही धुँआ अगर आपके दो माह के बच्चो के नाको मे चला जाता तो आप सोचो उसकी क्या हालत होती शायद वो मर भी जाता । जब यह धुँआ इतना घातक है तो फिर आप क्यो पिते हो । आप तो शिझित है । आपको तो ज्ञानी बनने का अंहकार है आप वाकपटुटा से सबको तो चुप करा देते हो फिर चुप क्यो बैठे हो पीये जा रहे हो जहर अपने साथ साथ निरपराध लोगो को भी धुँआ छोडकर मार रहे हो । कुछ तो शरम करो आधुनिक समाज के कर्णधार । क्या आप दुसरे लोगो को सताने के लिए ही इस धरा पर आये हो ?

यह दुसरा सज्ज़न अपनी पाकेट से क्या निकाल रहे है अरे यह तो आपसे भी गये गुजरे निकले इनके हाथ मेँ तो खैनी है केँसर को निमन्त्रण दे रहे है इनके मुंह की दुर्गन्ध के मारे इनके दोस्त इनसे नफरत करते है लेकिन दोस्ती के कारण कुछ कहते नही । इस खैनी और गोबर मेँ कोई फर्क नहीँ जिसको कुछ समय पहले शान से गाल मेँ दबाये बैठे थे । और जनाब अब तो आपके बच्चे भी चुपके से आपकी पैकेट से निकालकर सेवन करने लग गये । पुरे परीवार का कल्याण कर दिया ।

अबकी बार इनके सरताज आ रहे है आप देखिये किस प्रकार झुमते हुये आ रहे है । हाथ पैर ढीले पड गये लगता है इनके सर मेँ कीड़े चढ़ गये सत्य भी है जिस परीवार का मुखिया शराब का आदी हो जाये तो उस परीवार के अन्दर कीड़े ही पड जाते है शराबी के परीवार को खोने के अलावा कुछ नही मिलता न खाने को न सोने को इस शराबी के परिवार से लक्ष्मी रूठ जाती है और इनके परीवार शनै : शैनः दरिद्रता से मर जाते है ।

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